मैंने सोचा ना था




मैंने सोचा ना था के इतना पास आओगी तुम

मेरी मुस्कान बनकर मुझमें मुस्काओगी तुम।

मैंने सोचा ना था के मुझको महकाओगी तुम

इत्र बनकर महक मेरी बन जाओगी तुम।

मैंने सोचा ना था के इतना चाहोगी तुम

रूह बनकर जिस्म में समां जाओगी तुम।

Bhoopendra Pawar

पेट भर गया और हम सो गए।


एक दिन, खाली पेट हम भी बागी, क्रांतिकारी हो गए
फिर पेट भर गया और हम हसीन सपनों में खो गए।

कमाना चाहते थे बहुत, कुछ बदलना चाहते थे
हुकूमत ने मुफ़्त रोटी दे दी तोह गुज़र-बसर करने लगे।

बदलाव तोह चाहते थे, देश में अच्छी सरकार चाहते थे
मुफ़्त में दारू मिली तोह हम बहकावे में आ गए।

हम तख्त पलटना जानते थे, वोट की कीमत जानते थे
किसी ने क्या कीमत लगाई ,साड़ी और पौओं में बिक गए।

वो लूटते रहे हम लुटाते रहे, हमें सोने की चिड़िया बताते रहे
घर के बरतन तक बिक गए और हम तमाशा देखते रहे।

वो लुटेरा वाकपटुता जानता था , हम सम्मोहित हो गए
मोह टूटा आंख खुली तोह पता चला पांच साल हो गए।

Bhoopendra Pawar

सुरक्षित सफर सुरक्षित जान।


 

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भिय्या मेरा कहना मान
सुरक्षित सफर सुरक्षित जान।

बाबू गाड़ी तेज ना भगाना
सीट बेल्ट भी जरूर लगाना
नियमों का तुम रखना मान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

वाहन गति नियंत्रित रखना
ट्रेफिक नियम का पालन करना
भैया कीमती है अपनी जान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

गलत ओवरटेक ना करना
सिग्नल का ध्यान तू धरना
भिया ट्रेफिक पुलिस का कर सम्मान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

पापा थोड़ा देर से आना
पीकर गाड़ी मत चलाना
हो तुम किसी चेहरे कि मुस्कान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

बारिश में गढ्डों से बचना
फिसलन में धीमे ही चलना
गढ्डों का तुम रखना ध्यान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

सड़क सुरक्षा से समझौता
यमराज को क्यूं देते न्यौता
भय्यू हेलमेट बचाता है जान
सड़क सुरक्षा रखना ध्यान।

NAME- BHOOPENDRA PAWAR

COLLAGE NAME- GACC COLLAGE INDORE M.P.

CLASS- M.S.W.2nd year

CITY- INDORE

CONTACT NO.- 9575433957

दोस्ती


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नई नई दोस्ती में वो बात कहां, रंगत कहां, वो स्वाद कहां?
दोस्ती समय मांगती है,और वक्त के साथ गहराती जाती है
और फिर पुराने चावलों की तोह बात ही अलग है।

Social distancing सामाजिक दूरी


मै बार बार लोगो को पहचानने में गलती कर देता हूँ और धोखा खाता हूँ। इससे मुझे बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे, आर्थिक, मानसिक, सामाजिक और शारीरिक क्षति.

लोग मेरा फायदा उठाते हैं, किसी रक्त चूसक परजीवी की तरह , आस्तीन में पले सर्प की तरह काट लेते है किसी दिन ।और मै धोखा खाकर भी लड़खड़ाकर उठ जाता हूँ और निकल पड़ता हूँ आगे सबक लेकर की अब इस तरह तोह धोखा नहीं खाऊंगा।

और जब मैं मिलता हूँ किसी से तो उसका मन टटोलने की कोशिश करता हूँ ताकि उसकी भावनाएं समझ पाऊं,नीति समझ पाऊं,पर लोग भरोसा तोड़ने का कोई भी मौका नहीं गवाते,वे सारे दाव पेंच जानते है और,नए नए तरीके ढूंढ़ निकालते है धोखाधड़ी के.

लेकिन इन सब के बीच में , सामने वाले के मन की और मेरे मन की बाहरी भावनाए एक समान सी होती हैं। शुरू शुरू में मुझे यह समझने में बहुत ही कठिनाई होती है। असल में लोग जैसे दिखते है, वास्तविकता में वो ऐसे है नही।

लोग धोखा देने के अलग अलग तरीके खोजा करते है पैतरे बदलते है।कब किसे किस समय किन परिस्थितियों में धोखा देना है सब योजनाबद्घ तरीके से सुनिश्चित करते है।

लोग स्वार्थी है, वे अपने मतलब से मतलब रखते है,यदि आप उनके काम नहीं आ सकते तोह वे आपको दूध पड़ी मक्खी के तरह निकाल कर बाहर फेंक देंगे, वो आपका साथ छोड़ देंगे। ऐसी स्थिति में सामाजिक दूरी बनाना आवश्यक है।

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सामाजिक दूरी
कितनी जरूरी?

लोग आपका विश्वास तोड़ते है
मतलब निकल जाने के बाद
आपको नीचा दिखाते है
मौका मिलते ही अपमानित करते है।

ऐसे लोगो से सामाजिक दूरी बना लें।

आपका सबसे विश्वनीय
प्रिय आपको दुःख देता है
हिय को चोट पहुंचाता है
आपकी आत्मा कचोटता है।

ऐसे प्रियजनों से सामाजिक दूरी बना लें।

आप पर मुसीबत आने पर
दोस्त आपसे दूर भागते हो
आपको मिले अवसर पर खुद आगे हो जाए
और अनअवसर पर आपको आगे कर दे।

ऐसे दोस्तो से सामाजिक दूरी बना लें।

ऐसे सगे-सम्बन्धी जो सुख में उपस्थित होते हो
और दुःख में दूर भागते हो
अधिक धन प्राप्त होने पर अहंकारी हो जाए
आपको सफल होते देख आपसे द्वेष करने लगे।

ऐसे रिश्तेदारों से सामाजिक दूरी बना लें।

संघर्ष


एक तुच्छ महामारी में तुम कितने स्वार्थी हो गए,

तुमने दुसरो का मुँह से निवाला छीन लिया,

तुमने हथियार उठा लिए, लोगो को लूटा,

अपने परिवार का पेट भरने के लिए.

अब आखिर जब तुम्हारी जान पर बन आई,

तोह तुमने परिवार को भी मौत के मुँह में झोंक दिया.

क्या दिखा रहे हो अपने बच्चों को?

क्या सीखा रहे हो अपने बच्चो को?

के जब भी मुसीबत आए तोह

संघर्ष के स्थान पर,

युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखा कर भाग जाओ?

वक़्त नाजुक हैं ,हालात बेक़ाबू न होने दो,

ऐसे हाल में कोई भी मूर्खता ना करो.

इंसान हो इंसानियत का पैगाम दो,

अपने हो या पराए सबको सम्मान दो.

तुमने क्या खो दिया, किसने तुम्हारा क्या बिगाड़ दिया?

ऐसी भ्रांतियों से तुम डरो।

इंसान हो इंसानियत को मरने मत दो,

महामारी से डर कर मर तो रहे हो,

कम से कम जिंदा होने तक

अपने अंदर के इंसान को मत मरने दो।

ऑनलाइन तो हूं पर 🤳


ऑनलाइन तो हूं पर दिखना नहीं चाहता
इसीलिए सेट कर लेता हूं प्राइवेसी
किसी को पता ना चले मेरी मौजूदगी
इसीलिए लास्ट सीन भी छिपा लेता हूं।😏

सोशल नेटवर्किंग की दुनिया भी
कितनी अजीब है ना
लोग नए नए चेहरे खोजते हैं
दूर दराज के इलाकों में।
जानना चाहते है अनजानों को
टटोलना चाहते हैं उनको भीतर से।🧐

अजीब बात है के जो
अपनों के साथ बिताने के लिए
समय निकाल नहीं निकाल पाता
कैसे वो सोशल साइट पर घंटों गुज़ार देता है।🙄

निक्कमो बेरोजगारों के लिए तोह
बिना सोशल नेटवर्किग के
समय बिताना कितना मुश्किल है?
किसी की क्या मजाल के कोई उनको
बिना कोई फायदा दिए काम निकलवा ले.🥱

वे ऑफलाइन नहीं मिल पाते क्यूकी
उनको ऑनलाइन होने से
फुर्सत नहीं मिल पाती।😔

आजकल का स्टूडेंट
ऑनलाइन क्लासेज पसंद करता है
घर में बड़े आराम से बिस्तर में लेट कर
सारी क्लासेज अटेंड कर लेता है
साथ साथ चैटिंग करते करते।😬

आजकल का आंत्रप्रन्योर युवा
ऑफलाइन वाले काम को
गैरजिम्मेदारो के भरोसे छोड़कर
ऑनलाइन बैठकर मीटिंग्स प्लानिंग मैनेजमेंट
सारा बिजनेस फोन पर संभालने में लगा है।😗

ये स्मार्ट फोन वाली ओवर स्मार्ट वुमनिया
कितने साहस से रिलेनशिप स्टेटस
में दिखाती है
“सिंगल रेडी टू मिंगल”.🧐#घपाघप👉👌

अब 4 जी के टाइम में
सरकारी दफ़्तर में
अधिकारी भी आपको साक्षात
ड्यूटी पर “आलवेज ऑनलाइन”
देखे जा सकते हैं,
लोगों से ये कहते हुए कि
“कल आना अभी हम बहुत बिज़ी हैं।”😎

आजकल ना मेरा बॉस बड़े आराम से
मोबाइल पर चैटी याते हुए
एक हाथ में मोबाइल
दूसरे में कॉफी का कप लेकर
नीरस भाव से वक़्त पर काम पूरा
करने की धौस दे देता है।😠

और तो और स्मार्ट फोन के जमाने में
बच्चे भी स्मार्ट पैदा हो रहे है
मेरा पड़ोसी कहता है कि
उसका बच्चा मोबाइल फोन से
वो सब कर सकता है
जो मै भी नहीं कर सकता।🙄

वाह रे दुनिया 🙏, वाह रे मोबाइल फोन।📲
दिल 💞जुड़ने से पहले तुड़वा💔 दिया रे तूने सील।

#घपाघप🤬

बुराई


हम बुरे है हमको,

बुरा करके छोड़ दो;

रिश्ता तुम यूं हमसे,

धीरे धीरे तोड़ दो।

राज़


कुछ राज़ दफ़न होने को हैं

कुछ ख़्वाब दफ़न होने को हैं;

राज़ों को राज़ रहने दो

वो राज़ छुपाना जरूरी है।

कुछ ख्वाबों को ख़्वाब रहने दो,

हर ख़्वाब हो पूरा क्या ज़रूरी है।